84 महादेव सावन में यात्रा: भाग 1 (मंदिर 1 से 8) – मार्ग मानचित्र और समय

भाग 1: हरसिद्धि और महाकाल क्लस्टर – उज्जैन 84 महादेव यात्रा मंदिर 1–8

उज्जैन की पवित्र 84 महादेव परिक्रमा के मंदिर 1–8 का सवेरे 9 बजे का मार्गदर्शन

इस भाग के मंदिर हिंदी में

नीचे इस भाग में शामिल सभी मंदिरों की जानकारी हिंदी में दी गई है:

🛕 इस भाग के मंदिर

1

श्री अगस्त्येश्वर महादेव

📍 उज्जैन

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श्री अगस्त्येश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: उज्जैन
कथा: यह मंदिर 84 महादेव परिक्रमा का भाग 1 है।
महत्व: दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है।

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2

श्री गुहेश्वर महादेव

📍 रामघाट

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श्री गुहेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: रामघाट
कथा: इस मंदिर से जुड़ी कथा ऋषि मंकणक से संबंधित है। वे वेद और वेदांग में पारंगत एक महायोगी थे, जो सिद्धि प्राप्ति के लिए तपस्या में लीन रहते थे। एक दिन तपस्या करते समय इनके हाथ में कुश का कांटा लगा, लेकिन वहां से रक्त की जगह शाक रस बहने लगा।
महत्व: अहंकार का नाश इस लिंग के दर्शन एवं अर्चना से होता है। साथ ही दिव्य सिद्धियाँ प्राप्त करने की क्षमता जागृत होती है।

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3

श्री ढुंढेश्वर महादेव

📍 रामघाट

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श्री ढुंढेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: रामघाट
कथा: कैलाश पर्वत का गणनायक ढुंढ अत्यंत कामी और दुराचारी था। उसने इन्द्रलोक में नृत्य कर रही अप्सरा रंभा को पुष्प गुच्छ फेंककर व्यंग्य किया। इसके कारण इन्द्र ने उसे शाप दे दिया, जिससे वह मृत्युलोक में गिरकर बेहोश हो गया।
महत्व: ढुंढेश्वर महादेव के दर्शन और आराधना से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही खोई हुई प्रतिष्ठा (पद) भी वापस मिलती है। यदि कोई पूरे कार्तिक मास में शिप्रा में स्नान करता है पर ढुंढेश्वर महादेव का दर्शन नहीं करता, तो उसे कार्तिक स्नान का पुण्य प्राप्त नहीं होता।

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4

श्री डमरुकेश्वर महादेव

📍 हरसिद्धि मार्ग

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श्री डमरुकेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: हरसिद्धि मार्ग
कथा: एक समय असुर वज्रासुर ने देवताओं को स्वर्ग से निकालकर धरती पर आतंक मचा दिया। देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव ने डमरू से प्रहार कर एक दिव्य लिंग उत्पन्न किया।
महत्व: यहाँ दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और भक्त को साहस एवं विजय की प्राप्ति होती है। यह स्थान उन भक्तों के लिए विशेष है जो कठिनाइयों और चुनौतियों से उबरना चाहते हैं।

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5

श्री स्वर्णजलेश्वर महादेव

📍 महाकालेश्वर परिसर

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श्री स्वर्णजलेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: महाकालेश्वर परिसर
कथा: एक कथा के अनुसार, यह शिवलिंग सृष्टि के आरंभ से ही अस्तित्व में था—सबसे पहले प्रकट हुआ, हजारों वर्ष पहले से—जिसमें अग्नि, सूर्य, पृथ्वी, दिशाएँ आदि सब सृष्टि के बाद आए। इसीलिए इसे 'अनादिकल्पेश्वर' कहा जाता है। दूसरी कथा बताती है कि ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता का प्रश्न उठने पर आकाशवाणी आई कि महाकाल वन में एक शिवलिंग है जिसे किसी ने भी प्रथम या अंतिम नहीं देखा।
महत्व: इस महादेव के दर्शन मात्र से अन्य सामान्य तीर्थों में किए गए अभिषेक से भी अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। यहाँ आने वाले भक्त चाहे पापों से ग्रस्त क्यों न हों, इस दिव्य लिंग के दर्शन करते ही वे पापों से शुद्ध हो जाते हैं।

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6

श्री कपालेश्वर महादेव

📍 महाकालेश्वर के पास

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श्री कपालेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: महाकालेश्वर के पास
कथा: कहा जाता है कि एक समय भगवान शिव ने अपने दिव्य तेज से एक स्वर्ण ज्वाला उत्पन्न की थी। उसी ज्वाला के प्रभाव से यह शिवलिंग प्रकट हुआ। इस कारण इसे 'स्वर्णज्वालेश्वर' कहा जाता है।
महत्व: यह मंदिर उन भक्तों के लिए विशेष है जो धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति की कामना रखते हैं। यहाँ पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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7

श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव

📍 महाकाल परिसर

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श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: महाकाल परिसर
कथा: कहा जाता है कि एक बार देवऋषि नारद स्वर्गलोक में इंद्र देव के दर्शन करने गए। वहाँ इंद्र देव ने नारद मुनि से महाकाल वन का माहात्म्य पूछा। नारद मुनि ने बताया कि महाकाल वन सभी तीर्थों में श्रेष्ठ है, जहाँ साक्षात महेश्वर अपने गणों सहित निवास करते हैं।
महत्व: यह मंदिर उन भक्तों के लिए विशेष है जो मनोकामनाओं की पूर्ति की इच्छा रखते हैं। विशेष रूप से अष्टमी, चतुर्दशी और संक्रांति के दिन यहाँ पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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8

श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव

📍 अनंत पेठ

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श्री अनादिकल्पेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
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स्थान: अनंत पेठ
कथा: कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान शिव ने कापालिक वेश धारण कर ब्राह्मा और अन्य देवताओं को कपालों के ढेर में शिवलिंग के दर्शन कराए। इस कारण इसे 'कपालेश्वर' कहा जाता है।
महत्व: यह मंदिर उन भक्तों के लिए विशेष है जो ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति की कामना रखते हैं। विशेष रूप से आषाढ़ और श्रावण मास में यहाँ पूजा का विशेष महत्व है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What is the 84 Mahadev Yatra and why is Part 1 important?

The 84 Mahadev Yatra is a sacred pilgrimage circuit of 84 Shiva temples in Ujjain. Part 1 covers the foundational temples 1-8 in the Harsiddhi and Mahakal cluster. These temples establish the spiritual tone for the entire yatra, beginning with Agastyeshwar where Sage Agastya himself consecrated the first Linga.

How long does it take to visit all 8 temples in Part 1?

Starting at 9:00 AM from Hotel Shrimmaya, you can comfortably complete all 8 temples by 1:30 PM. The route is designed to avoid peak crowd hours at each shrine, with the busiest periods at Mahakal falling after your planned departure.

Can I skip any temple in this circuit?

Every temple in the 84 Mahadev circuit holds unique spiritual significance according to the Skanda Purana. While you can physically skip temples, completing all 84 is believed to bring complete karmic purification. If time-pressed, at minimum visit Agastyeshwar (1) and Anadikalpeshwar (8).

Where should I stay during the 84 Mahadev Yatra?

Hotel Shrimmaya in Ujjain offers the ideal base with its central location near Mahakal. They provide complimentary vegetarian breakfast, family suites, and full assistance with route planning and cab bookings for the entire yatra.

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