84 महादेव सावन में यात्रा: भाग 11 (मंदिर 81 से 84) – भव्य समापन

भाग 11: भव्य समापन और पवित्र पूर्णता – उज्जैन 84 महादेव यात्रा मंदिर 81–84

उज्जैन की पवित्र 84 महादेव परिक्रमा के मंदिर 81–84 का सवेरे 9 बजे का मार्गदर्शन

इस भाग के मंदिर हिंदी में

नीचे इस भाग में शामिल सभी मंदिरों की जानकारी हिंदी में दी गई है:

🛕 इस भाग के मंदिर

81

श्री महामृत्युंजय महादेव

📍 मक्सी रोड

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श्री महामृत्युंजय महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: मक्सी रोड
कथा: पौराणिक मान्यता के अनुसार कथा के अनुसार, एक महान तपस्वी ने वर्षों तक निरंतर भगवान शिव की आराधना की। उसके शरीर का रंग तप और साधना के प्रभाव से पिंगल (ताम्रवर्ण) हो गया, किंतु वह किसी वर की इच्छा नहीं रखता था। उसकी निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने स्वयं इस स्थान पर प्रकट होकर उसे दर्शन दिए और कहा कि उसका तप संपूर्ण क्षेत्र के कल्याण का कारण बनेगा।
महत्व: निष्काम भक्ति का प्रतीक। अहंकार, आलस्य और मानसिक अशुद्धियों से मुक्ति।

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82

श्री प्रयाग महादेव

📍 करोहन गाँव

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श्री प्रयाग महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: करोहन गाँव
कथा: पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव ने अपने दिव्य स्वरूप में अवतरण किया था। मान्यता है कि यहां शिव भक्ति एवं तपस्या से साधकों को विशेष फल प्राप्त होता है। इस स्थल पर विराजमान शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है।
महत्व: भगवान शिव के दिव्य अवतरण का स्थान। काया में अवरोहण – दिव्य शरीर में प्रवेश।

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83

श्री सिद्धेश्वर महादेव

📍 अमोदिया / कंथारखेड़ी

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श्री सिद्धेश्वर महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: अमोदिया / कंथारखेड़ी
कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव बिल्व वृक्ष के नीचे प्रकट हुए थे। बिल्व पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, और इसी कारण यहां विराजमान शिवलिंग का नाम बिल्वकेश्वर पड़ा। यह शिवलिंग प्राचीन एवं स्वयंभू स्वरूप माना जाता है।
महत्व: बिल्व वृक्ष की धार्मिक महत्ता का प्रतीक। भगवान शिव को प्रिय बिल्व पत्र का आधार।

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84

श्री मोक्षदायल महादेव

📍 शिप्रा तट, कार्तिक चौक

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श्री मोक्षदायल महादेव
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⏰ दर्शन: सुबह 5:00 – रात्रि 9:00
🎫 प्रवेश: निःशुल्क
📸 फोटोग्राफी की अनुमति

स्थान: शिप्रा तट, कार्तिक चौक
कथा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर भगवान शिव अत्यंत दुर्गम एवं कठिन परिस्थितियों में भी भक्तों की रक्षा करते हैं। "दुर्दर" शब्द का अर्थ है कठिन अथवा दुर्गम — इसी कारण इस शिवलिंग का नाम दुर्दरेश्वर पड़ा। कहा जाता है कि संकट में पड़े भक्तों ने यहां भगवान शिव की आराधना की और उन्हें तुरंत शिव कृपा प्राप्त हुई।
महत्व: दुर्गम परिस्थितियों में रक्षा। संकट निवारण और भय से मुक्ति।

📍 गूगल मानचित्र पर देखें

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

What temples are covered in Part 11?

Part 11 covers temples 81-84 of the 84 Mahadev circuit in Ujjain. This section includes unique shrines with specific spiritual significance described in the Skanda Purana.

How long does the Part 11 circuit take?

Starting at 7:30-9:00 AM from Hotel Shrimmaya, you can complete the 4 temples in this part by early afternoon. Each temple typically requires 15-25 minutes for darshan.

What should I bring for the yatra?

Carry water, comfortable walking shoes, a light towel for holy dips, and small denomination notes for temple offerings. Most temples accept offerings of flowers, bilva leaves, and vermilion. Start your day with the complimentary breakfast at Hotel Shrimmaya.

Can I complete all 84 temples in one day?

While physically possible, it's not recommended. The traditional approach spreads the yatra across 11 days (one part per day), allowing proper time for darshan, prayer, and reflection at each shrine. Hotel Shrimmaya can help plan an optimized multi-day itinerary.

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